यहां एक-दूसरे पर अंगारे फेंककर खेलते हैं होली

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नई दिल्ली : भारत विभिन्न संस्कृतियों को अपने में समेटे हुए है। यहां अलग अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परम्पराएं निभाई जाती है। कुछ परंपराएं तो इतनी भयावह होती है, जिनकी आप कल्पनाएं भी नहीं कर सकते। कर्नाटक के धारवाड़ जिले के एक गांव में स्थित कलमेश्वर मंदिर में हर साल लोग एक-दूसरे पर जलते हुए अंगारे फेंककर होली खेलते है।

इस स्थान पर यह प्रथा हर साल उगादी त्यौहार के पांच दिन तक मनाई जाती है। इसी दौरान लोग रात में पास के जंगल से लकड़ियां लाकर मंदिर के सामने जला देते हैं।

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लकड़ियां जब जलकर अंगारों का रूप ले लेती हैं तो लोग इन अंगारों को एक-दूसरे के उपर फेंकते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि इतने भयानक अंगारे लगने के बाद भी न तो उन्हें जलन होती है और न ही किसी तरह का कोई जख्म इस खेल से होता है। इस स्थान पर भगवान कलमेश्वर के तीन मंदिर हैं वीरबल्ली कलमेश्वर, तवरगेरी कलमेश्वर और यरिमली कलमेश्वर।

कार्यक्रम स्थल पर तीनों भगवान को पालकी से लाया जाता है और इनके पीछे सैकड़ों लोग आग से होली खेलते हुए दौड़ाते हैं। अंगारों की इस होली में दस साल से 80 साल के बुजुर्ग तक भाग लेते है। महिलाएं केवल दूर से पुरुषों की इस होली को देख सकती है। होली कार्यक्रम में शामिल होने की उन्हें इजाजत नहीं है। गांव के लोग अंगारों की होली की यह परंपरा कब से निभा रहे हैं किसी को पता नहीं, हां सैकड़ों वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह परंपरा गांव के लोग अवश्य निभाते आ रहे है।

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