जीवन में संजोकर रखें अच्छी यादें

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एक बार दो दोस्त कहीं जा रहे थे। रास्ते में वे जगह-जगह रुकते और कुछ देर आराम के बाद आगे बढ़ते थे। दोपहर को जब भूख लगी तो उन्होंने अपने थैले में रखे खाने को एक जगह बैठकर खा लेने का सोचा। खाने के दौरान ही दोनों में किसी बात पर बहस छिड़ गई। बात इतनी बढ़ गई कि एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को थप्पड़ मार दिया। लेकिन थप्पड़ खाने के बावजूद दूसरा दोस्त चुप रहा और उसने कोई विरोध नहीं किया। बस वह उठा और पेड़ की एक टहनी उठाकर मिट्टी पर यह लिख दिया, ‘आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा।’ थोड़ी देर बाद उन्होंने फिर यात्रा शुरू की, लेकिन मनमुटाव हो जाने की वजह से रास्तेभर बात किए बिना आगे बढ़ते गए। तभी थप्पड़ खाए दोस्त के चीखने की आवाज आई। वह दलदल में फंस गया था। दूसरे दोस्त ने जल्दी टहनी की मदद से उसे बाहर निकाला। बाहर निकलने पर दोस्त ने नुकीले पत्थर से पेड़ पर लिखा, ‘आज मेरे दोस्त ने मेरी जान बचाई।’ तब उस दोस्त ने इससे पूछा-जब मैंने तुम्हें थप्पड़ मारा तब तुमने मिट्टी पर लिखा और अब पेड़ पर कुरेद कर लिख रहे हो। ऐसा क्यों? पहला दोस्त बोला-खराब यादों को दिल में गहराई तक न जाएं, ताकि क्षमा रूपी हवाएं इसे हमारे दिल से बहाकर ले जाएं। दूसरा अच्छी यादें दिलों में बसा लेनी चाहिए।

मंत्र : अच्छी यादें संजोकर रखें, बुरी यादें मन पर हावी न होने दें।

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