नवरात्र में शक्ति उपासना से मिलेगी सफलता, ये करें उपाय

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नवरात्र में शक्ति उपासना से मिलेगी सफलता
maa_durga Image Source: twitter.com

नवरात्र को शक्ति अर्जित करने के तौर पर जाना जाता है। यह शक्ति की उपासना का पर्व है। जगत में शक्ति के बिना कोई काम सफल नहीं होता है। चाहे आपका प्लानिंग कितनी भी अच्छी हो, आपके विचार कितने ही सुंदर और उच्च हो, लेकिन अगर आप शक्तिहीन हैं तो आपके विचारों का कोई मोल नहीं। विचार अच्छा है, सिद्वांत अच्छा है, इसलिए सर्वमान्य हो जाता है ऐसा नहीं है।

चुनाव में भी देखो तो हार-जीत होती रहती है। ऐसा नहीं है कि यह आदमी अच्छा है इसलिए चुनाव जीत गया। वह आमदी बुरा है इसलिए चुनाव हार गया। यह सर्वविदित है कि आदमी अच्छा हो या बुरा। चुनाव में जीतने के लिए जिसने ज्यादा शक्ति लगाई वह चुनाव जीत गया। वास्तव में देखा जाए तो किसी भी विषय में जो ज्यादा शक्ति लगाता है वह जीतता ही है।

वकील जानते है कि कई बार ऐसा होता है कि मुवक्किल चाहे ईमानदार हो चाहे बेईमान। परंतु जिसके वकील के तर्क जोरदार-जानदार होते हैं वह केस जीत जाता है। ऐसे ही जीवन में विचारों और सिद्वांतों को प्रतिष्ठित करने के लिए बल चाहिए। जीवन में कदम-कदम पर कैसी-कैसी मुश्किलें, कैसी-कैसी समस्याएं आती है। उनसे लड़ने के लिए उनका सामना करने के लिए शक्ति चाहिए। यह शक्ति आराधना और उपासना से मिलती है। शक्ति की अधिष्ठात्री देवी है जगदम्बा और उनकी उपासना का पर्व है नवरात्र।

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नवरात्र को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है। इनमें पहले तीन दिन तमस से जीतने की आराधना के हैं। नवरात्र के दूसरे तीन रजस के है। इन तीन दिनों में महालक्ष्मी की उपासना करनी चाहिए। तीसरे तीसरे दिन सत्व के माने जाते है। जब जब व्यक्ति महामाया जगदम्बा की अर्चना उपासना आराधना करता है तब तब वह विजयी होता है। श्रीमद्देवी भागवत शक्ति के उपासकों का मुख्य ग्रंथ है। उसमें मां जगदम्बा की महिमा का वर्णन है। उसमें आता है कि जगत में अन्य जितने व्रत व विविध प्रकार के दान हैं वे नवरात्र की तुलना कदापि नहीं कर सकते। क्योंकि नवरात्र का व्रत महासिद्वि देने वाला, धन-धान्य प्रदान करने वाला, सुख-संतान बढ़ाने वाला, धन-धान्य बढ़ाने वाला तथा आयु व आरोग्य प्रदान करने वाला है। महान पापी भी अगर नवरात्र के व्रत कर लें तो उसके सब पापों का नाश हो जाता है। यदि कोई पूरे नवरात्र व्रत नहीं कर सके तो उसे सप्तमी, अष्टमी और नवमी तीन दिन उपवास करके देवी की पूजा करने से संपूर्ण नवरात्र का फल प्राप्त होता है।

ऐसे माना जाता है कि नवरात्र के दिनों में जल्दी उठकर स्नान कर पूजा-ध्यान करने वाले व्यक्ति को आयु, आरोग्य, ऐश्वर्य, धन और पुत्र-पौत्रादि की प्राप्ति होती है।

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ऐसे मनाएं नवरात्र

  • नवरात्र के दौरान उपवास रखने के लिए समय एक बार ही भोजन करें। भोजन शुद्व व शाकाहारी होना चाहिए। इसे बनाते समय लहसुन और प्याज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • सर्वप्रथम मां दुर्गा को भोजन अर्पित करें। इसके बाद प्रसाद के रूप में भोजन करना चाहिए।
  • भोजन शुरू और अंत के समय जय मातादी का उच्चारण नौ बार करना चाहिए।
  • ज्यादा अच्छा है कि भोजन सूर्यास्त के बाद ग्रहण किया जाए।
  • पूरे दिन फलाहार, ज्यूस, दूध आदि का सेवन किया जाता है। हालांकि कुछ लोग पूरे दिनभर में फल और तरल पदार्थों का ही सेवन करते हैं। यह भक्तों की श्रद्वा पर निर्भर करते हैं।
  • नवरात्र के पूरे समय भक्तों को अपने दिमाग, शरीर और विचार को शुद्व रखना आवश्यक है। प्रयास यह होना चाहिए कि भक्त रोज मां भगवती के मंदिर में जाएं और प्रार्थना करें।
  • मां की प्रतिमा या तस्वीर के सामने ज्योति अवश्य जलाएं। माता रानी को जोतांवाली भी कहा जाता है।
  • नवरात्र के दौरान जमीन पर दरी बिछाकर सोना श्रेयस्कर माना जाता है।
  • नवरात्र में दाढ़ी, बाल या नाखून काटना वर्जित माना गया है।
  • उपवास के दौरान चमड़े और काले कपड़ों का प्रयोग निषिद्व है।
  • मां भवानी को प्रसाद के रूप में हलवा, पूरी और छोले का भोग लगाना चाहिए।
  • अष्टमी या नवमी के दिन नौ कन्याओं को श्रद्वापूर्वक भोजन कराना चाहिए तथा दक्षिणा देनी चाहिए।

साधना का संगम नवरात्र

कलश स्थापना, देवी दुर्गा की स्तुति, सुमधुर घंटियों की आवाज, धूप-बत्तियों की सुगंध, यह नौ दिनों तक चलने वाले साधना का पर्व नवरात्र का चित्रण है। भारत की संस्कृति में नवरात्र पर्व की साधना का विशेष महत्व है। नवरात्र में ईश-साधना और अध्यात्म का अद्भूत संगम होता है। नवरात्र में रामायण, भागवत पाठ व अखंड कीर्तन जैसे सामुहिक धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। यही कारण है नवरात्र के दौरान प्रत्येक इंसान एक नए उत्साह और उमंग से भरा दिखाई पड़ता है। सच तो यह है कि देवी दुर्गा की पवित्र भक्ति से भक्तगणों को सुपथ पर चलने की प्रेरणा मिलती है।

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व्रत-उपवास के लाभ

नवरात्र को ईश्वर की उपासना का पर्व माना गया है। इन दिनों भक्त रामायण व गीता का पाठ करते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन दिनों में व्रत-उपवास रखने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और सुख प्राप्त होता है। नवरात्र पर्व पर यदि देवी की उपासना सामूहिक रूप से की जाएं तो परम आनंद की प्राप्ति होती है। सामूहिक प्रार्थना के पीछे समाज को संगठित करने का संदेश छिपा है। नवरात्र के नौ दिनों में बुरे विचार, क्रोध, छल-कपट, ईर्ष्या आदि जैसे दुगुणों पर नियंत्रण आवश्यक है। नौ दिन तक मानव कल्याण की भावना रखने से अनुष्ठान का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

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