Christmas Celebration: कोरोना के बीच दुनियाभर में क्रिसमस का उल्लास, जानें- क्यों कहते हैं इसे बड़ा दिन ?

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    Christmas Celebration: कोरोना महामारी के बीच दुनियाभर में क्रिसमस (Christmas Celebration) का उल्लास छाया हुआ है। भारत में भी गिरिजा घरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग गिरिजा घरों में जाकर प्रभू यीशू की अराधना करते रहे हैं। क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्योहार है। इसी दिन जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था। इस दिन से रात छोटी और दिन बड़ा होना प्रारंभ होते है। इसलिए इसे बड़ा दिन (Bada Din) भी कहते हैं।

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    christmas celebration in Goa : क्रिसमस को लेकर विशेष रूप से चर्च को सजाया जाता है और यीशु मसीह की जन्म गाथा को झांकी के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। क्रिसमस की पूर्व रात्रि गि‍‍‍‍रिजाघरों में रात में प्रार्थना सभा की जाती है, जो रात के 12 बजे तक चलती है। ठीक 12 बजे लोग अपने प्रियजनों को क्रिसमस की बधाईयां देते हैं और खुशियां मनाते हैं। जीसस क्रिस्ट को भगवान का बेटा (Son of God) कहा जाता है। क्रिसमस (Christmas) का नाम भी क्रिस्ट (Christ) से पड़ा। जीसस क्रिस्ट को भगवान का बेटा कहा जाता है। बाइबल के अनुसार जीसस ईश्वर के पुत्र हैं और शांति व प्रेम के मसीहा भी हैं।

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    • ईसाई धर्म के लोग पूरी दुनिया में क्रिसमस के त्योहार को बड़ी धूमधाम और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह त्योहार हर साल 25 दिसम्बर को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था।
    • 25 दिसंबर को रोम के लोग रोमन उत्सव के रूप में सेलिब्रेट करते थे, इस दिन लोग एक-दूसरे को ढ़ेर सारे उपहार देते थे, धीरे-धीरे ये उत्सव काफी बड़ा हो गया इसलिए इस दिन को लोग बड़ा दिन कहने लगे।
    • इस दिन को बड़ा दिन कहने के पीछे एक और कहानी प्रचलित है। प्रचलित कहानी के मुताबिक सदियों पहले ये दिन भारत में मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता था, जो कि काफी पावन होता था इसलिए इसे बड़ा दिन नाम दिया गया।
    • ईसा मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था, ऐसा माना जाता है, भारत में इस दिन को रोमन यामकर संक्रांति से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया था इस कारण भी इस दिन को बड़ा दिन कहा जाता है।

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