आखिर सत्ता के सेमीफाइनल में क्यों हारी भाजपा? जानिए वे 10 कारण

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आखिर सत्ता के सेमीफाइनल में क्यों हारी भाजपा?

नई दिल्ली : देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इन चुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल बताने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मतगणना के बाद बोलती बंद हो गई। उन्हें नहीं सूझ रहा है कि वो इस हार पर क्या प्रतिक्रिया दें। राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भाजपा की हार सही मायने में पीएम नरेंद्र मोदी व पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की हार है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भाजपा को फिर से सत्तारूढ़ कराने के लिए प्रचार-प्रसार की कमान स्वयं अमित शाह व पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने हाथों ली। तीनों राज्यों में जीतने के लिए पार्टी के स्टार प्रचारक लगाए गए। लेकिन जनता को इस बार भाजपा नेताओं के वादे रास नहीं आएं।

भाजपा नेता विकास का नारे देते रह गए। लेकिन जनता इनके नारों पर भरोसा नहीं कर सकी। जनता को लगा कि अब केवल खोखले नारों में दम नहीं रहा। जनता धरातल पर विकास चाहती है हवा में नहीं। आज हम बताने जा रहे हैं वो 10 प्रमुख कारण, जिनके कारण भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा नेताओं ने अगर इनका जल्द समाधान नहीं किया तो लोकसभा 2019 में पार्टी को इससे भी बुरी हार देखनी पड़ सकती है। तो आइए जानते है कौनसे है वो 10 कारण जिनके कारण भाजपा हारी…

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1. पेट्रोल-डीजल GST के दायरे में नहीं लाना

पिछले दिनों पेट्रोल-डीजल की दामों में बेहताशा बढ़ोतरी हुई। पेट्रोल-डीजल के दाम आसमां छू रहे थे। उस समय जनता केंद्र सरकार से पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग करती रही। लेकिन केंद्र सरकार के मंत्री पेट्रोल-डीजल को जल्द ही GST के दायरे में लाने का आश्वासन देते रहे, लेकिन इस पर अमल नहीं किया गया। भाजपा सांसद सुबहमयम स्वामी ने भी पेट्रोल-डीजल की रेट कम करने की मांग सरकार से की थी। उन्होंने कहा कि सरकार को 32 रूपए प्रति लीटर पेट्रोल बेचना चाहिए।

2. महंगाई की मार से त्रस्त हुआ आम आदमी

महंगाई 2014 में चुनाव का प्रमुख मुद्दा था। महंगाई कम करने और आम आदमी को राहत देने की बात करने पर ही जनता को भाजपा को केंद्र की सत्ता की चाबी सौंपी थी। लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा सरकार ने अपने वादे से मुहं मोड़ लिया। महंगाई कम होने की बजाय नोटबंदी और जीएसटी के कारण कई गुणा बढ़ गई। आम आदमी महंगाई से मार से त्रस्त होता रहा, लेकिन सरकार के मंत्री मस्त होकर सत्ता में होने का आनंद लेते रहे।

3. श्रीराम मंदिर का मुद्दा

भारतीय जनता पार्टी केंद्र में अध्योया में राम मंदिर बनवाने के बाद सता में आई। इसी कारण जनता ने भाजपा सरकार को पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज की करवाया। लेकिन वोट बैंक की राजनीति के कारण भाजपा इस ओर कोई कदम नहीं उठा पाई। हिन्दू संगठनों का कहना है कि राम मंदिर बनवाने की बात को दूर, प्रधानमंत्री एक बार भी अध्योया में रामलला के दर्शन करने नहीं गए। इस बार पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले जब पूरजोर तरीके से राम मंदिर के लिए संसद में अध्यादेश लाने की बात की जा रही थी। तब भी भाजपा नेता चुप्पी साध गए। लोगों का कहना है कि अगर भाजपा वास्तव में ही मंदिर बनाना चाहती है तो क्यों नहीं संसद में अध्यादेश लाती। अध्यादेश पास हो या नहीं। लेकिन इससे सरकार की नीयत को साफ हो जाती।

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4. कालाधन व 15 लाख का जुमला

2014 लोकसभा चुनाव से पहले जिस तरह भाजपा ने विदेशों में रखा कालाधन वापिस लाकर सभी के खाते में 15-15 लाख जमा कराने का सपना दिखाया। वो इस पार्टी को सत्ता में लाने के लिए काफी था। लोगों को विश्वास था कि मोदी विदेशों से कालाधन लेकर आएगा और सभी के खातों में 15-15 लाख जमा हो जाएंगे। जीवन की सारी समस्याएं दूर हो जाएगी। जनता की थोड़ी आस उस वक्त जगी जब सभी लोगों के जन’धन के खाते बैंकों में खुलवाएं गए। लेकिन जनता की आंखें उस समय खुली की खुली रह गई जब भाजपा अध्यक्ष ने एक साक्षात्कार में 15 लाख देने के वादे के बारे में पूछे गए प्रश्न में कहा, वो तो चुनावी जूमला था। इस तरह चुनाव से पहले किए गए वादों को सीरियस नहीं लिया जाता। कालाधन विदेशों से वापिस नहीं आया, बल्कि बड़े उद्योगपति देश का हजारों करोड़ रूपए लेकर विदेश भाग गए।

5. भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने का वादा

प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 चुनाव से पहले देश में भ्रष्टाचार बंद करने तथा भष्ट्राचारियों को जेल भेजने की बात बोली थी। लेकिन अफसोस भाजपा शासनकाल भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं गई या फिर जिन पर कार्रवाई हुई वे सारे भ्रष्टाचारी जमानत पर बाहर घूम रहे हैं। भ्रष्टाचार कम होने की बजाय और अधिक बढ़ गया।

6. धारा 370 नहीं हटाना

देश के लोगों को विश्वास था कि केंद्र में भाजपा सरकार आने पर कश्मीर से धारा 370 हटा ली जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कश्मीर से विस्थापित हुए लाखों कश्मीर पंडितों को आज भी दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। धारा 370 हटाने का फैसला कोई मजबूत सरकार ही ले सकती है, लेकिन यह सरकार इस मुद्दे पर कमजोर ही साबित हुई।

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7 SC/ST एक्ट लागू करना

SC/ST एक्ट के कारण काफी निर्दोष लोगों को जेल जाना पड़ता था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न होकर पहले किसी सक्षम अधिकारी द्वारा जांच हो, उसके बाद ही गिरफ्तारी की जाएं। लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने अध्यादेश लाकर तुरंत गिरफ्तारी को यथावत रखा। इस कारण देश में सवर्णों में रोष व्याप्त हो गया। देश में भिन्न स्थानों पर इसे लेकर आंदोलन भी हुए।

8. गौहत्या पर पाबंदी नहीं

मोदी सरकार में बीफ का निर्यात चार गुणा बढ़ गया है यानी पहले से चार गुणा अधिक गायें काटी जा रही है। सरकार में आने से पहले भाजपा ने देश में गौहत्या पर पूर्णतः पाबंदी लगाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार आते ही गौहत्या व बीफ पर पूर्णतः पाबंदी लगा दी जाएगी। लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। वरन गौ रक्षकों को प्रधानमंत्री मोदी ने गुंडा तक कह दिया। यह भाजपा की दौगली नीति दर्शाता है।

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9. किसानों की आत्महत्या व लाठी चार्ज

किसानों को फसलों का उचित दाम दिलवाने, कर्जमाफी, खाद व कीटनाशक दवाइयां सस्ती देने के वादे भाजपा सरकार ने किए। वादे पूरे नहीं हुए तो किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा। किसानों ने आंदोलन किया तो उन पर लाठीचार्ज किया गया। इसलिए किसान भाजपा सरकार से रूष्ट थे।

10. बेरोजगारी

बेरोजगारी देश में एक प्रमुख समस्या है। देश में बेरोजगारों की लंबी फौज है। देश का बेरोजगार युवा कुंठागस्त होकर अपराध की ओर अग्रसर हो रहा हैं। भाजपा सरकार ने बेरोजगारी मिटाने के बड़े-बड़े कार्यक्रम बनाए, लेकिन धरातल पर वे सब फेल होते दिखाई दिए। देश में बेरोजगारी की स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है। युवा के रोजगार नहीं मिलने से युवा वर्ग भी भाजपा से खासा नाराज दिखाई दिया।

ये 10 ऐसे प्रमुख मुद्दे रहे जिन्हें भाजपा पूरी नहीं कर पाई। इस कारण उसे जनता की नारागजी झेलनी पड़ी। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के जरिए जनता ने अप्रत्यक्ष से भाजपा की केंद्र सरकार को चेतावनी भी दी है कि अगर इन मुद्दों को हल नहीं किया गया तो 2019 में इससे भी बड़ी हार के लिए भाजपा को तैयार रहना होगा।

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