Vaibhav Laxmi Vrat Benefits: इस तरह करें वैभव लक्ष्मी का व्रत, खुशियों से भर जाएगी झोली

0
283
Vaibhav Laxmi Vrat Benefits: इस तरह करें वैभव लक्ष्मी का व्रत, खुशियों से भर जाएगी झोली

मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने का फल बहुत जल्दी ही मिल जाता हैं। Vaibhav Laxmi Vrat Benefits जानकर आप हैरान रह जाएंगे। कलयुग में वैभव लक्ष्मी धन और वैभव देने वाली देवी है। मां लक्ष्मी के आठ रूप है। इन आठ रूपों में वैभव लक्ष्मी, आदि लक्ष्मी, श्री गज लक्ष्मी, श्री विजया लक्ष्मी, श्री संतान लक्ष्मी, ऐश्वर्य लक्ष्मी तथा वीर लक्ष्मी है। इन सभी रूपों में महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। शुक्रवार का व्रत जो किया जाता हैं वह मां वैभव लक्ष्मी का व्रत हैं। इसे धन-सम्पदा तथा घर में जो भी सुख-सुविधा की चीजें हैं। इनकी प्राप्ति के लिए इस व्रत को किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से बहुत ही जल्द मनोकामना पूर्ण होती है। आइए हम जानते हैं कि इस व्रत को कैसे किया जा सकता है…

जब भी व्रत शुरू किया जाएं तो वह किसी भी माह के शुक्ल पक्ष की तिथि से किया जाएं। शुक्ल पक्ष से व्रत शुरू करना शुभ माना जाता है। इसमें व्रत रखने से इसका फल अतिशीघ्र मिलता है।

इस तरह लें Vaibhav Laxmi Vrat का संकल्प

शुक्रवार के दिन सुबह नित्यकर्म से निवृत होने के बाद स्वच्छ कपडे़ पहनकर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष हाथ में चावल और लाल फूल लेकर 11, 21 या 51 व्रत करने का संकल्प लेते हुए अपना मनोरथ प्रकट करें। मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वह आपको व्रत करने का सामर्थ्य दें। यह सकंल्प श्रीयंत्र के समक्ष भी लिया जा सकता है।

यह भी पढ़ें : Tips of Vastu: महिलाएं वास्तु की इन टिप्स का फॉलों करें, घर में आएगी खुशहाली

इस समय करें मां वैभव लक्ष्मी की पूजा

वैभव लक्ष्मी के व्रत की पूजा शुक्रवार के दिन शाम के समय होती है। सूरज अस्त होने से कुछ देर पहले शाम के समय वैभव लक्ष्मी की पूजा करनी होती है। पूर्व दिशा की ओर मुहं कर पूजा करनी चाहिए।

इस तरह करें पूजा की तैयारी

चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर लगा लें। यदि आपके पास श्रीयंत्र है तो उसे भी लगाया जा सकता हैं। एक मुठ्टी चावल की ढेरी बनाकर उस पर एक छोटे लोटे में पवित्र जल भरकर रखें। इस लोटे के उपर अशोक या आम के पत्ते लगा लें। इसके बाद इसके उपर एक कटोरी में थोडे़ चावल रखकर उसमें सोने या चांदी की अगूंठी या इनसे बना अन्य कोई सामान रखें। सोने या चांदी की अंगूठी न हो तो एक सिक्का भी रखा जा सकता है।

पूजा की थाली में हल्दी, रोली, चावल रख लें। इस पूजा में लाल फूल का विशेष महत्व है। इसलिए पूजा में लाल फूल अति आवश्यक है। अच्छा होगा कि आप पूजा में कमल के लाल फूल रखें। इससे आप मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के पात्र बनेंगे।

यह भी पढ़ें : 5 मंगलवार करें ये उपाय, मिल जाएगी सभी संकटों से मुक्ति

ऐसे करें मां Vaibhav Laxmi की पूजा

मां लक्ष्मी के सामने एक घी का दीपक जला लें। फिर रोली और हल्दी से मां लक्ष्मी के तिलक करना है तथा चावल लगाने हैं। इसके बाद आपको जल से भरे कलश पर इसी प्रकार तिलक करना है। फिर आपको सोने या चांदी का जो भी सामान पूजा में रखा है। उसे रोली, हल्दी, चावल लगाकर तिलक करना है। इसके बाद आपको मां लक्ष्मी के सामने लाल पुष्प अर्पित करना होता है। यह लाल फूल, गुडहल, कमल या गुलाब का हो सकता है। इसके बाद आप खीर के प्रसाद का भोग लगाएं। मां लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि वह आपके सारे कष्टों को दूर कर आपकी मनोकामना पूरी करें।

इसके बाद आपको मां वैभव लक्ष्मी की किताब की पूजा भी करनी है। इसके बाद आप श्रद्वा पूर्वक Vaibhav Laxmi Vrat Katha पढ़ें। कथा समाप्ति पर आरती करें तथा मां लक्ष्मी से क्षमायाचना करें कि पूजा में जाने-अनजाने कोई चूक हो गई हो तो मां लक्ष्मी क्षमा करें। इसी तरह पूजा आपको हर शुक्रवार करनी है जितने भी शुक्रवार आपने पूजा का संकल्प लिया है।

पूजा जमीन पर बैठकर नहीं करें। इसका विशेष ख्याल रखें। इससे पूजा का फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए पूजा आसान पर बैठकर ही करनी चाहिए।

व्रत में क्या खाएं क्या ना खाएं

मां वैभव लक्ष्मी के व्रत में एक समय भोजन किया जा सकता है। यह आपकी श्रद्वा के उपर निर्भर करता है। आप चाहे तो एक समय फलाहार रख सकते हैं। यदि कोई शारीरिक रूप से दुर्बल है तो वह दोनों वक्त भी भोजन कर व्रत कर सकता है। यह व्रत बहुत ही आसान है। आपने पहले शुक्रवार को जो नियम बना लिया। वही नियम आपको आगे के शुकवार में पालन करना होगा।

कौन कर सकता है यह व्रत

इस व्रत को कुंवारी कन्याएं, सुहागन स्त्री, पुरूष आदि सभी इस व्रत को कर सकते हैं। लड़की हो या लड़का कोई भी इस व्रत को कर सकता है। इस व्रत का खास नियम यह है कि इसमें आपको घर पर बना हुआ भोजन की करना है। भोजन में खीर भी शामिल हो तो और अधिक अच्छा है।

यह भी पढ़ें : आखिर Puja के बाद क्यों की जाती है Aarti ? जानिए इसके पीछे का कारण..!!!

व्रत वाले दिन बाहर जाना पडे़ तो..

यदि आपने व्रत प्रारंभ कर दिए और किसी शुक्रवार आपको शादी-विवाह या अन्य किसी कार्य से बाहर जाना पड़े तो वहां आप यह व्रत नहीं रख सकते। इसकी पूजा केवल आपके घर में हो सकती है। ऐसा भी नहीं है कि आप घर में पूजा कर बाहर भोजन कर लें। ऐसे में व्रत मान्य नहीं होगा। ऐसे में आप उस शुक्रवार का व्रत छोड़कर अगले शुक्रवार से कन्टीन्यू कर सकते हैं। व्रत वाले दिन आपको बाहर का पानी तक नहीं पीना चाहिए। घर से बाहर जाते समय अपने साथ पानी की बोतल ले के जाएं। महिलाओं को मासिक धर्म आने पर उस शुक्रवार पूजा नहीं करनी है। वह शुक्रवार पूजा की गिनती में शामिल न करें। आपको उन्हीं दिनों की गिनती करनी है जिस दिन आपने व्रत किया, उपवास किया तथा पूजा की है।

ऐसे करें व्रत का उद्पायन

जब भी आपके सारे व्रत पूरे हो जाएं। आपको व्रत का उद्पायन करना है। उद्यापन के दिन आपको एक नारियल मां लक्ष्मी के सामने चढ़ाकर अपनी श्रद्वा प्रकट करनी है। उद्पायन करने के दो-तीन तरीके है। कुंवारी लड़कियों को उद्पायन में 7 या 11 लड़कियों को ही बुलाना चाहिए। सुहागन स्त्रियों को उद्पायन में सुहागन स्त्रियों को बुलाना चाहिए। इन सुहागन स्त्रियों को सुहाग की सभी चीजें भेंट करनी है। संभव हो तो उद्पायन में आने वाली लड़कियों और महिलाओं को भोजन कराएं। भोजन कराना संभव नहीं हो तो मां वैभव लक्ष्मी के लिए खीर का प्रसाद बनाएं। भोग लगाने के बाद सभी को एक-एक कटोरी खीर का प्रसाद अवश्य दें। उन सभी को तिलक करें तथा वैभव लक्ष्मी की पुस्तक तथा श्रद्वापूर्वक दक्षिणा दें। इस तरह आपका वैभव लक्ष्मी का व्रत पूर्ण हो जाता है।

कोई पुरूष इस व्रत को करता है तो उसे उद्पायन में 7 या 11 कुंवारी अथवा सुहागन स्त्रियों को बुलाकर उन्हें मां लक्ष्मी का रूप मानकर भोजन कराना है। इसके पश्चात दक्षिणा देनी है।

Also Read:

Latest Hindi News से जुड़े, अन्य अपडेट के लिए हमें फेसबुक पेज, और ट्विटर पर फॉलो करें

Leave a comment