Surya Grahan 2019: 2 जुलाई को होगा सूर्यग्रहण, जानें इस दौरान क्या करें, क्या न करें, ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय

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इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) 2 जुलाई की मध्यरात्रि को होगा। सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। लेकिन ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए कुछ वैदिक उपाय मनुष्य को अवश्य करने चाहिए।

दो जुलाई को यह ग्रहण रात 11.31 से शुरू होकर 2.15 बजे मध्यरात्रि तक रहेगा। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले यानी सुबह 10 बजकर 25 मिनट से शुरू हो जाएगा। लेकिन भारत में सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण सूतक का प्रभाव नहीं होगा। सूतक का प्रभाव उन्हीं स्थानों पर होता हैं। जिन स्थानों पर सूर्यग्रहण व चंद्रग्रहण दिखाई दें।

ज्योतिषियों की मानें तो ग्रहण कहीं भी लगे, लेकिन अलग-अलग राशियों पर उनका प्रभाव पड़ना निश्चित है। अपनी राशि पर ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए व्यक्ति को दान-पुण्य का सहारा लेना चाहिए। सूर्यग्रहण के उपरांत स्नानादि कर गरीब लोगों को वस्त्र, अन्न व धन का दान करना चाहिए।

क्या होता है ग्रहण का सूतक

शास्त्रों की मानें तो सूतक समय को अशुभ माना जाता है। इस दौरान कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ नहीं करना चाहिए। सूतक में भगवान की पूजा व देव दर्शन भी वर्जित माना गया। वैदिक नियमों के अनुसार सूर्यग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। यह सूतक ग्रहण के मोक्षकाल या समाप्त होने के बाद समाप्त होता है।

ग्रहणकाल के दौरान क्या करें

  • ग्रहण के दौरान संयमपूर्वक जप-ध्यान करने से कई गुणा फल की प्राप्ति होती है।
  • ग्रहण से पहले खाने-पीने की चीजों में कुश व तुलसी की पत्तियां अवश्य डाल दें। पका हुआ भोजन हो तो उसे गाय या कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान अन्न व जल का त्याग करना चाहिए। सूतक में आवश्यक होने पर ही तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग करें।
  • ग्रहणकाल के समाप्त होने के बाद घर में साफ-सफाई अवश्य करें।
  • ग्रहण के बाद स्नान कर अन्न व वस्त्र का दान करना चाहिए।
  • ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुण पुण्य प्राप्त होता है।

ग्रहणकाल के दौरान क्या न करें

  • ग्रहण के समय कोई भी शुभ न नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहणकाल के दौरान भोजन करना, खाना पकाना, शौच के लिए जाना व सोना नहीं चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधान बरतनी चाहिए। भूलकर भी ग्रहण न देखें। इससे होने वाली संतान विकलांग होने का भय रहता है।
  • ग्रहण व भूकंप के समय पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए।
  • ग्रहण में पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ना चाहिए। बाल नहीं कटवाने चाहिए।
  • ग्रहण के दौरान मंदिर या घर में स्थापित पूजाघर में पूजा नहीं करनी चाहिए। भगवान की मूर्ति को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए। अच्छा होगा कि घर पर बने मंदिर में पर्दा लगा दें।
  • ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण दर्शन तो भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

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