इस तरह पानी पीते हैं आप, तो कभी नहीं होंगे बीमार

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taambe ke bartan mein paani peene ke fayde

आयुर्वेद में तांबे को विशेष महत्व दिया जाता है। इसके लाभकारी गुणों को देखकर आयुर्वेद में कहा गया है कि रोजाना एक गिलास पानी का सेवन करने से पेट से संबंधित रोगों से छूटकारा मिल जाता है। अभी तक तो ऐसा केवल आयुर्वेद का मानना था लेकिन अब इफेक्टिव गुणों पर विज्ञान ने भी मुहर लगा दी है। आपने घरों में अक्सर किसी बड़े को यह कहते सुना होगा कि तांबे के बर्तन में पानी रखो और उसे सुबह खाली पेट पियो, इससे स्वास्थ्य लाभ होगा। आपने ऐसा किया भी होगा। लेकिन अब आयुर्वेद के इस नुस्खे पर विज्ञान ने प्रमाणित माना है। तांबे के गुणों पर शोध ने उसके जीवाणु नाशक गुण को सिद्व कर दिया है।

taambe ke bartan mein paani peene ke fayde

बीमारियां होती है दूर

तांबा एक ऐसी धातु है जिसके उपयोग से लोगों को कई तरह से स्वास्थ्य लाभ हो सकता है। रातभर तांबे के पात्र में रखे पानी को सुबह उठकर खाली पेट पीने से पेट से संबंधित बीमारियों से निजात मिल जाती है। इसके अलावा इससे डायजेस्टिव सिस्टम को भी सुधारा जा सकता है। इसके प्रयोग से लीवर की कार्यक्षमता में भी वृद्वि होती है। तांबा से 90 से 100 फीसदी तक बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता है।

डॉक्टर्स की राय

डॉक्टर्स का कहना है कि तांबे में जीवाणु रहित करने का गुण पाया जाता है। अतः इससे बने पात्र में पानी भरने से पानी में उपस्थित बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। इस पानी का प्रयोग करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल किया जा सकता है।

प्रयोग की सलाह पर जोर

हमारी प्राचीन परंपरा भी हमें तांबे का प्रयोग करने की सलाह देती है। तांबे के जीवाणु रहित करने के गुणों के कारण ही उसका प्रयोग नियमित रूप से करने को कहा जाता रहा है। हमारे बड़े-बुजूर्ग हमेशा तांबे के पात्र में रखे पानी का सेवन करने की सलाह देते हैं।

तांबे के उपयोग के लाभ

  • ब्लड़ प्रेशर को नियंत्रित करता है।
  • हार्ट के एन्जाइम्स को एक्टिवेट करता है।
  • लीवर के एन्जाइम्स को एक्टिवेट करता है।
  • मेटाबोलिज्म की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।
  • लीवर की क्षमता बढ़ाता है।

जीवाणुरहित करता है तांबा

तांबे का प्रयोग करने से जीवाणुओं की संख्या काफी कम हो जाती है। तांबे में उपस्थित तत्व उस स्थान को भी बैक्टीरिया रहित कर देते है जहां उसका प्रयोग किया गया हो। यह बात किए शोधों में तब सिद्व हुई, जब उन्होंने टॉयलेट में तांबे का नल और अन्य सामान लगाकर उसकी तुलना पूर्व में लगी एसेसरीज से की और पाया कि पहले की अपेक्षा परिवर्तन के बाद बैक्टीरिया की संख्या काफी हद तक कम हो गई।

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