सफलता के ये दस कदम चलिए, हर काम में मिलेगी सफलता

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सफलता के ये दस कदम चलिए

सफलता प्राप्त करना हर कोई चाहता है। हमारे आसपास मौजूद लोगों में से कुछ ऐसे होते हैं। जो सफल होना चाहते हैं। लेकिन उनके व्यक्त्वि का भोलापन और व्यवहार की सहजता उन्हें ऐसा करने से रोकती है। ऐसे लोग भोले और सीधे कहलाते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि ये कभी किसी का बुरा नहीं चाहते। फिर भी ये अपने समकक्षों से अक्सर पीछे रह जाते हैं। ये बड़े भावुक और संवेदनशील होते हैं। ऐसे लोग दिमाग से ज्यादा दिल की सुनते हैं।

दस कारण जो सीधे और भोले-भाले लोगों की असफलता से सीधे जुड़े हैं। यदि आप भी ऐसे हैं तो ये दस कदम आप भी चलिए। यकीन मानिए आप सीधे रहकर भी सफल बन जाएंगे।

पहला कदम – खुद पर भरोसा

खुद पर भरोसा या अपने उपर आत्मविश्वास एक ऐसी मनोभावना है जो आपके हर काम में आपका सबसे पहला साथी होती है। किसी काम की सफलता के लिए जी-तोड़ मेहनत से पहले आपको खुद पर भरोसा होना चाहिए कि आप काम को अंजाम तक पहुंचा सकेंगे। यदि ऐसा नहीं होगा तो आप भोले बनकर उसी भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे। जो खुद की योग्यता को कम और दूसरों की सलाहों पर ज्यादा भरोसा करती है।

दूसरा कदम – योग्यता

आपकी योग्यता आपका सबसे बड़ा हथियार है। एक सफल और असफल व्यक्ति में योग्यता का अंतर ही सबसे प्रमुख अंतर होता है। आप मेहनत तो बहुत करते हैं लेकिन योग्यता के सवाल को हमेशा टाल जाते हैं। तो क्या आपकी सफलता हमेशा अधूरा रास्ता तय करेगी। आपको सीधे रहकर सफल बनना है तो अपनी योग्यता को अपने समकक्षों से बेहतर बनाने के प्रयास करने होंगे। योग्यता की पूंजी हमेशा बढ़ती है। इसलिए ज्ञान अर्जित कीजिए और दूसरों में बांटिए।

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तीसरा कदम – योजना

यदि आपको खुद पर भरोसा है और आप योग्य भी है। लेकिन काम का तरीका व्यवस्थित नहीं है तो न तो जिदंगी व्यवस्थित होगी और न ही दिनचर्या। अधिकांश सीधे लोगों की यही परेशानी रहती है कि वे योजना बनाने का गुर नहीं जानते। इसके अभाव में दूसरों पर निर्भर रहते हैं। जब उनके आसपास के लोग योजना बनाकर अपना हित सिद्व कर लेते हैं। तो अक्सर सीधे-सादे लोगों को यह कहते सुना जा सकता है कि भलाई का तो जमाना ही नहीं रहा। लेकिन, ऐसा नहीं है यदि आप खुद को सफल बनाने के लिए आवश्यक योजना और बैकअप तैयार रखें तो सफल जरूर बन सकते हैं

चौथा कदम – सफलता के लिए बदलाव है जरूरी

जमा पानी सड़ जाता है और बहता पानी निर्मल बना रहता है। सफल लोगों की जिंदगी का भी यही दर्शन होता है कि वे बदलाव को सहजता से लेते हैं। आपका सरल और सहज होना विशिष्ट गुण बन जाएगा। यदि उसके साथ सकारात्मक बदलाव जुड़ जाए। आप अच्छे बने रहें। लेकिन एक जगह न बने रहें। बदलाव समय की ही नहीं, व्यक्तित्व की भी मांग है। यदि आप नहीं बदलेंगे तो समय और आसपास के लोग बदल जाएंगे। ऐसे आप पीछे रह जाएंगे।

पांचवां कदम – अंदर से बनाएं खुद को मजबूत

अधिकांश लोग केवल इसी उधेड़बुन में पीछे रह जाते हैं कि वे खुद से ही लड़ते रहते हैं। लड़ने की वजह एक अंतर्द्वद्व होता है जिसमें एक मन कहता है कि दूसरों जैसे बन जाओ। दूसरा कहता है कि जैसे हो वैसे बने रहो। कुछ लोग तो जिंदगीभर यही लड़ाई लड़ते रहते हैं। ऐसे में वे खुद को भूला बैठते हैं। यह भावुक मन की अति संवेदनशील मनोवैज्ञानिक स्थिति होती है। जो किसी को भी असहाय बना सकती है। यदि आप ऐसा नहीं चाहते तो खुद को अंदर से मजबूत और स्व प्रेरणा से सहयोगी बनाइए।

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छठा कदम – चुनौतियां करें स्वीकार

आपका किया हर एक कदम और आपको मिला हर मौका एक चुनौती की तरह होता है। जो लोग इस बात को समझकर व्यवहार करते हैं। उनकी सफलता की संभावना दूसरों के मुकाबले कई गुणा अधिक बढ़ जाती है। चुनौती मन और शरीर को लक्ष्य की दिशा में साधकर हमें लक्ष्य केंद्रित बनाती है। जो लोग चुनौती लेने से घबराते हैं, सफलता भी उनसे उतना ही दूर चली जाती है। स्वभाव की सहजता कई बार चुनौती लेने से रोकती है लेकिन यदि सहजता को व्यक्तित्व व चुनौती को सफलता का मंत्र माना जाए। तो आपकी सफलता निश्चित है।

सातवां कदम – टीम वर्क

माना कि आप बड़े सरल, सहज, समझदार और योग्य व्यक्ति है। लेकिन यदि टीम के महत्व को भूलकर कोई काम करने में विश्वास रखते हैं तो आपकी सफलता एकाकी हो जाएगी। एकाकी से तात्पर्य यह कि न तो आप मान सकेंगे कि आप सफल है और न ही दूसरों को जता सकेंगे। इसके विपरीत यदि आप टीम वर्क और साझेदारी से कोई काम करते हैं तो न सिर्फ आप सफल होते हैं। बल्कि टीम में आपसी प्रतियोगिता के कारण गुणों को निखारने का अवसर मिलता है। टीम में अपनी सहज वृत्ति के कारण आपको सम्मान भी मिलता है और सफलता भी।

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आठवां कदम – भावुकता से बचें

काम कैसा भी हो उसमें आपकी भावुकता आपको ऐसा सब करने पर मजबूर कर देती है। जिसे समझौता नाम दिया जा सकता है। कई काम ऐसे होते हैं जो आपको साफ-सुथरी सफलता दिला सकते है। लेकिन आप सिर्फ इसलिए नहीं करते कि आपका मन आपके बस में नहीं होता। दिमाग जोर डालता है कि आपको ऐसा करना चाहिए। लेकिन दिल कहता है कि नहीं, ऐसा नहीं करना चाहिए। बेशक, आप ऐसा कुछ न करें, जिससे दूसरों को नुकसान हो। लेकिन दिमाग की सुनकर वो जरूर करें जिससे आपको फायदा हो।

नौवां कदम – आपका व्यवहार सफलता की गारंटी

सीधे लोग अपने व्यवहार की भावुक कमजोरी के कारण ही अक्सर धोखा खाते हैं। ऐसे लोग करना तो भला चाहते हैं। लेकिन हो उसका उल्टा जाता है। इस स्थिति को सोच और व्यवहार में सामंजस्य बनाकर आप अपना सहज व्यवहार बनाए रख सकते हैं। इससे आपको सफलता अवश्य मिलेगी। आपका व्यवहार ही सफलता की गारंटी देता है। लेकिन व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि वह आपका सहयोगी बने और दूसरों को भी बनाएं। यदि आपका व्यवहार कमजोर और दब्बू प्रवृत्ति का रहा तो बजाय सफलता पाने के आप शोषण का शिकार हो सकते हैं।

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दसवां कदम – डर के आगे जीत

अधिकांश सीधे लोग किसी काम को शुरू किए बिना ही डर जाते हैं। ये डर असफलता का कम और सोच का ज्यादा होता है। इसे अनुभव और आत्मविश्वास की कमी भी कहा जा सकता है। अधिकांश लोग डर की कल्पना से ही इतने प्रभावित हो जाते हैं कि किसी काम को हाथ में लेने से पहले ही हार मान लेते हैं। उन्हें लगने लगता है कि वे कोई काम कर ही नहीं सकते। यदि करेंगे तो सफल नहीं होंगे। वे इसी सोच से डरे रहते है। जबकि उनके सामने समकक्ष लोग बिना डरे सफल बन जाते हैं। सफल लोग किसी खास किस्म के नहीं होते। न ही उन्हें ईश्वर से ऐसी कोई ऐसी शक्ति मिली होती है, जिसके बूते वो सफल होते हैं। वे तो बस प्रयास करने में विश्वास रखते है, डरने में नहीं।

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