Apollo 11 space mission: 50 साल पहले इंसान के चांद पर पहुंचने के सफर को देख रोमांचित हो उठेंगे आप, देखें वीडियो

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apollo 11 space mission google doodle celebrates 50 years

Google Doodle on Apollo 11 Space Mission: आज ही के दिन 50 साल पहले इंसान चांद पर पहुंचने के अपने सपने को साकार कर पाया था। जी हां आज ही का दिन था जब इंसान चांद की सरजमीं पर कदम रखने में सफल हो सका। Google ने भी गूगल डूडल (Google Doodle) के जरिए इस सुनहरे ऐतिहासिक क्षणों को फिर एक बार साकार कर दिया है।

आज मानव इतिहास का वह अद्वितीय दिन है जब मानव को चांद पर पहुंचने में सफलता मिली। मानव सभ्यता के विज्ञान ने आज के दिन चांद तक पहुंचकर अपना लोहा मनवाया। विश्वभर के लोगों के लिए आज जश्न का दिन है।

आपने अभी तक यूट्यूब पर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के चंद-अभियान को कई बार देखा होगा। लेकिन आज गूगल ने जिस तरह अपोलो 11 अतंरिक्ष मिशन (Apollo 11 space mission) को अपने डूडल के माध्यम से वीडियो के रूप में प्रस्तुत किया वह वाकई कमाल है। नासा की ओर से भी ट्विटर पर इस अभियान को लेकर एक वीडियो शेयर किया गया है।

जिन लोगों को इंसान के चांद पर कदम रखने को लेकर थोड़ी भी उत्सुकता है। उनके लिए गूगल डूडल ने इस अभियान का वीडियो शेयर कर सरप्राइज किया है।

गूगल डूडल वीडियो की खास बात यह है कि इसमें आप अपोलो-11 मिशन से जुड़े तीसरे यात्री माइकल कॉलिस (Michael Collins) की आवाज सुन सकेंगे। कॉलिस की जुबानी आप इस वीडियो के जरिए धरती से चांद तक के सफर सुन रोमांचित हो उठेंगे।

बता दें कि कॉलिस उस अपोलो-11 मिशन के विमान चालक थे। जिसमें नील आमस्ट्रॉन्ग (Neil Armstrong) और एडविन एल्ड्रिन (Edwin Aldrin) के चंद्रमा पर उतरने के दौरान स्पेसक्राफ्ट उड़ा रहे थे।

सूरज और चांद को नजदीक से देखने का मिला मौका

गूगल डूडल वीडियो में माइकल कॉलिस ने अपनी चांद तक की जर्नी के बारे में बताते हुए कहा कि पृथ्वी से लाखों किलोमीटर उंचाई पर जाने के बाद पहली बार हम लोगों को चांद इतनी करीब से देखने का मौका मिला। हमारे स्पेसक्राफ्ट की खिड़कियों से सूरज साफ नजर आ रहा था। ऐसा लग था कि सूरज हमारे करीब आता जा रहा है। यह सब इतना रोमांचित करने वाला था कि धरती पर किसी भी चीज के देखने से इसकी तुलना नहीं की जा सकती है।

जब नील चांद पर उतरा, मैं कॉफी पी रहा था

गूगल डूडल वीडियो में माइकल कॉलिस ने अपने उस अनुभव को लोगों से साझा करते हुए बताया कि जब नील (नील आर्मस्ट्रॉन्ग) और बज (एडविन एल्ड्रिन) चांद की सतह पर चहल-कदमी कर रहे थे। उस दौरान मैं अपने यान में चांद के पिछले हिस्से का चक्कर लगाते हुए कॉफी पी रहा था।

16 जुलाई 1969 को प्रक्षेपित हुआ था यह रॉकेट

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 16 जुलाई 1969 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से सैटर्न वी रॉकेट का प्रक्षेपण किया था। यह प्रक्षेपण नासा के अपोलो-11 मून मिशन का हिस्सा था। यह रॉकेट नील आर्मस्ट्रॉन्ग, एडविन एल्ड्रिन और माइकल कॉलिस को चंद्रमा तक ले गया। इस रॉकेट के साथ द ईगल नामक एक उपग्रह जुड़ा हुआ था। इसके बाद यह यान 24 जुलाई 1969 को वापस धरती पर लौट आया। इस यान की लैडिंग प्रशांत महासागर में कराई गई।

4 लाख लोगों ने दिया मिशन में सहयोग

अपोलो-11 मिशन में दुनियाभर के 4 लाख लोगों ने सहयोग दिया था। इस मिशन में फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर, वैज्ञानिक और इंजीनियर ने अपनी-अपनी भूमिकाएं निभाई। इतने लोगों के सहयोग से मानव इतिहास की इस चमत्कारिक उपलब्धि को अंजाम दिया जा सका।

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