जानिए सफल व्यक्तियों की सफलता के पीछे क्या है कारण

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जानिए सफल व्यक्तियों की सफलता के पीछे क्या है कारण

जब भी आप किसी सफल व्यक्ति को देखते हैं तो वह इंसानी फितरत से रंगा नजर आता है। कोई बेहद मिलनसार है तो कोई घोर एकांतप्रिय। किसी का खुला हाथ है तो कोई कंजूस। कोई आपको मिलने की आपका मन मोह लेता है तो कोई बहुत बोरिंग सिद्व होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी में एक बात तो कॉमन होती है। यही विशेषता इन्हें औरों से अलग करती है और सफलता दिलाती है। इन लोगों को काम का नशा होता हैं।

सब लोग जानते है, जानी-मानी बात है कि व्यापार को शिखर पर पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। रोजाना 12 से 18 घंटे काम, दिन के भोजन के समय भी कारोबारी मुलाकातें, रात और छुट्टी के दिन भी काम करना पड़ता है। सब जानते हैं कि परिश्रम ही सफलता का पहला सूत्र है। मगर काम करने की नशा ही आपको परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।

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काम की लत

अधिकांश उद्योगपति स्वीकार करते हैं कि उन्हें काम का नशा है। अटलांटा के नौजवान उद्योगपति राबर्ट एडवर्ड टर्नर तृतीय ने एक इंटरव्यू में कहा, मैं घर वालों की सारी आवश्कताएं पूरी कर चुका हूं, फिर भी कमाए जा रहा हूं क्यों- क्योंकि यह एक ऐसी मस्ती है, जो छोड़ते नहीं बनती। यूनाइटेड टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन हैरी ग्रे को भयंकर एक्सीडेंट के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ गया। इस पर उन्हांने फाइलें लिए अपने सेक्रेटरी को भी वहां बुलवा लिया। उन्होंने महीनों पीठ के बल लेटे-लेटे काम निपटाया।

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सफल व्यक्ति नहीं करते छुट्टी में विश्वास

अधिकांश सफल व्यक्ति छुट्टी में विश्वास नहीं करते। सफल बिज़नेसमैन छुट्टियों और वीकएंड्स पर भी अपने काम में लगे रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों को केवल काम ही नजर आता है। वो चाहते हैं कि दिन के 24 घंटे भी काम करें। जब व्यक्ति को काम का नशा होता है तो वह न थकता है न रूकता है। बस आगे बढ़ते रहना चाहता है।

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सत्ता की लालसा देती है काम की प्रेरणा

सफल बिज़नेसमैन को कड़ी मेहनत की प्रेरणा कहां से मिलती है। पैसा कमाने की चाहत आदमी को बिजनेस करने के लिए अवश्य प्रेरित करती है। लेकिन उंचाइयां छूने का प्रेरक पैसा नहीं होता। यह प्रेरणा मिलती है सत्ता की लालसा से। मानसिटो कंपनी के प्रधान अधिकारी जॉन-वेलर हैनली को अब तक याद है कि किशोरावस्था से ही दूसरों से मनचाहा करा लेने की फिराक में रहते थे। शुरू-शुरू में जब वे सोडावाटर की दूकान में काम करते थे तब अपने ग्राहकों को मिल्क शेक में अंडा डालकर पीने का आग्रह किया करते थे।

डोनाल्ड नेल्सन फ्राई अपने परिश्रम के बल पर 44 वर्ष की आयु में फोर्ड मोटर्स के ग्रुप-वाइस प्रेसीडेंट बन गए। पर उन्हें तसल्ली नही मिली। वे कहते थे, मुझे एक पूरा कारोबार खुद चलाना है। अंततः फोर्ड को छोड़कर वे बेल एंड हाबेल के प्रधान अधिकारी बन गए। यह कंपनी फोर्ड के मुकाबले बहुत छोटी सी थी। मगर पूरी की पूरी उनकी अधीन थी।

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जानने की ललक

सभी सफल व्यक्तियों में जिज्ञासु प्रवृति पाई जाती है। ऐसे होनहारों का गुण उनके कॅरियर के प्रारंभ में दिखाई देने लगता है। वह कभी भी अपनी जगह पर नहीं बैठता। वह दूसरे विभागों में घूमता, लोगों से सवाल-जवाब करता, उन्हें परामर्श देता, तंग करता रहता है। उनसे जानकारी हासिल करता है।

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मौका न गंवाना

सफल व्यक्ति कभी कोई मौका अपने हाथ से नहीं निकलने देता। वह एकदम चौकस होता है। एक सफल बिजनेसमैन निजी फायदे का कोई भी मौका न चूकने के मामले में लाजवाब होता है सफल व्यक्ति सच्चे अर्थों में आस्थावान भी होते हैं। अपने काम में, अपने माल में, अपनी कंपनी में और निरंकुश उद्योग प्रणाली में उन्हें गहरी आस्था होती है।

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