खाटूश्यामजी: खाटूश्यामजी बाबा मंदिर की प्रबंधन समिति ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। मंदिर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुबह 7:00 बजे आयोजित होने वाली पारंपरिक श्रृंगार आरती में आंशिक संशोधन किया गया है। अब से यह आरती भाद्रपद माह की पहली रविवार से सुबह 7:15 बजे से प्रारंभ होगी। बाबा श्याम के दरबार में प्रतिदिन पांच बार आरतियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनमें हर एक का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
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आरतियों का समय और विशेषता
- मंगला आरती: यह दिन की पहली आरती सुबह 4:30 से 5:00 बजे के बीच होती है। इसे मंगला आरती कहा जाता है, जिसमें भक्त बाबा के प्रभात दर्शन प्राप्त करते हैं।
- श्रृंगार आरती: नई समय सारणी के तहत, यह आरती अब सुबह 7:15 बजे से होगी। इस दौरान बाबा श्याम का भव्य श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।
- भोग आरती: दोपहर 12:30 बजे आयोजित यह आरती बाबा को भोग अर्पित करने के लिए विशेष है। इस दौरान बाबा का अलंकृत स्वरूप देखने को मिलता है।
- संध्या आरती: शाम 7:00 बजे होने वाली यह आरती देशभर के मंदिरों में प्रचलित है। भक्त इस समय अपनी मनोकामनाएँ और प्रार्थनाएँ करते हैं।
- शयन आरती: रात 10:00 बजे होने वाली यह अंतिम आरती बाबा के विश्राम की तैयारी के साथ संपन्न होती है। इसके बाद बाबा विश्राम के लिए जाते हैं, और अगली सुबह 4:30 बजे मंगला आरती के साथ पुनः दर्शन शुरू होते हैं। इस तरह खाटू श्यामजी में बाबा श्याम के लिए कुल पांच समय की आरतियाँ आयोजित होती हैं।
भक्तों की आस्था और दर्शन का क्रम
इन पांचों आरतियों में भक्त अपनी मान्यताओं और सुविधा के अनुसार दर्शन करते हैं। स्थानीय खाटूवासी विशेष रूप से मंगला आरती और संध्या आरती के दौरान बाबा के दर्शन के लिए पहुँचते हैं। श्रृंगार आरती में बाबा के नए और सुंदर स्वरूप को देखने के लिए दूर-दूर से श्याम भक्त आते हैं। वहीं, कुछ भक्त बाबा को प्रसाद और भोग चढ़ाते हैं, और वे दोपहर 12:30 बजे की भोग आरती में भाग लेते हैं।
शाम 7:00 बजे की संध्या आरती में अधिकांश श्याम भक्त शामिल होते हैं, जहाँ वे अपनी मनौतियाँ और प्रार्थनाएँ अर्पित करते हैं। इसके बाद रात 10:00 बजे शयन आरती होती है, जो बाबा के विश्राम का प्रतीक है। इस आरती के बाद बाबा विश्राम के लिए चले जाते हैं, और अगली सुबह 4:30 बजे मंगला आरती के साथ भक्तों के लिए दर्शन पुनः शुरू हो जाते हैं।
विशेष अवसरों पर निरंतर दर्शन
सामान्य दिनों में बाबा रात 10:00 बजे के बाद विश्राम करते हैं, लेकिन विशेष दिनों में यह नियम बदल जाता है। एकादशी, द्वादशी, रविवार, प्रमुख त्योहार, और वार्षिक मेले की अवधि के दौरान मंदिर रातभर खुला रहता है। इन पवित्र अवसरों पर बाबा श्याम अपने भक्तों को निरंतर दर्शन प्रदान करते हैं, जिससे भक्तों की श्रद्धा और उत्साह दोगुना हो जाता है।
यह परिवर्तन श्रृंगार आरती के समय में भक्तों की सुविधा और मंदिर की परंपराओं को ध्यान में रखकर किया गया है। खाटूश्यामजी बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह बदलाव एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ वे अपने आराध्य के दर्शन और आशीर्वाद के लिए समय के साथ तालमेल बिठा सकेंगे। मंदिर समिति ने भक्तों से इस नए समय का पालन करने और अपनी यात्रा की योजना accordingly बनाने की अपील की है।
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