भीलवाड़ा: शास्त्री नगर की हेमा कृपलानी ने इच्छाशक्ति, मेहनत और जज्बे की शानदार मिसाल पेश की है। मात्र पांच साल पहले जब उनका वजन 94 किलो तक पहुंच गया था, तब उन्होंने खुद को पूरी तरह बदलने का फैसला किया। आज वे नेशनल स्तर पर पदक जीत रही हैं और सैकड़ों लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
2020 में हेमा जब अपने बढ़ते वजन से परेशान हुईं तो उन्होंने रोज जिम जाना शुरू कर दिया। लगातार मेहनत और डाइट के साथ उन्होंने एक साल के अंदर अपना वजन काफी कम कर लिया। जिम में लड़कों को पावरलिफ्टिंग करते देखकर उनके मन में भी इस खेल को अपनाने की जिद जाग उठी। शुरुआत में परिवार और समाज के तानों का सामना करना पड़ा, लेकिन हेमा ने हार नहीं मानी।
2023 में उन्होंने जूनियर वर्ग में पहली प्रतियोगिता खेली और राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर नेशनल क्वालिफाई किया। 2024 में जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। लेकिन असली चुनौती 2026 में आई।
मंगलौर में आयोजित सीनियर नेशनल क्लासिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हेमा 76 किलो वर्ग में उतरीं। प्रतियोगिता से महज सात दिन पहले वे गंभीर बीमारी का शिकार हो गईं। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी थी और खुद हेमा भी हिस्सा लेने का मन छोड़ चुकी थीं। लेकिन उनके कोच नितेश सिंह रावत ने उन्हें हिम्मत दी। आखिरी समय में तत्काल टिकट बुक कर वे मंगलौर पहुंचीं और वहां कमाल कर दिखाया।
76 किलो वर्ग के स्क्वाट इवेंट में उन्होंने कांस्य पदक जीता। कुल 422.5 किलो वजन उठाकर उन्होंने ओवरऑल चौथा स्थान हासिल किया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बीमारी के बावजूद हार नहीं मानी और अंतिम समय में मैदान पर उतरकर सबको हैरान कर दिया।
हेमा बताती हैं कि पावरलिफ्टिंग की शुरुआत उनके लिए आसान नहीं थी। “लड़की है, इतना भारी वजन उठाती है”, “खेल नहीं पढ़ाई पर ध्यान दो” जैसे ताने उन्हें अक्सर सुनने को मिलते थे। लेकिन उन्होंने इन तानों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उनके माता-पिता दयालराम और कविता कृपलानी ने हर कदम पर उनका साथ दिया। इसी सपोर्ट और अपनी लगन के बल पर हेमा आज इस मुकाम तक पहुंची हैं।
हेमा की उपलब्धियां
- 2023: राज्य स्तर पर गोल्ड मेडल
- 2024: जूनियर नेशनल गोल्ड मेडल
- 2026: सीनियर नेशनल में स्क्वाट इवेंट में कांस्य पदक (422.5 किलो कुल वजन)
अब हेमा सिर्फ खुद को नहीं, बल्कि दूसरों को भी मजबूत बना रही हैं। वे शास्त्री नगर में अपना जिम चलाती हैं, जहां खासतौर पर लड़कियों को पावरलिफ्टिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। उनका उद्देश्य लड़कियों को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना भी है।
हेमा कृपलानी की कहानी साबित करती है कि उम्र, वजन, बीमारी या समाज के तानों कुछ भी हो, अगर इरादा पक्का हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। वे न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए महिला सशक्तिकरण की बेहतरीन मिसाल बन गई हैं।
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