टोंक। जिले के गांवों में रहने वाली हजारों किशोरियों की आवाज पहले घर की चारदीवारी या स्कूल के गेट तक ही सीमित रह जाती थी। समस्याएं थीं, लेकिन मंच नहीं था। अब 15 बेटियों ने इन आवाजों को दिशा दी है।
इस समूह का नाम युवा सलाहकार परिषद है। यह परिषद पीपलू और टोंक ब्लॉक के 133 गांवों से जुड़ी 6 हजार किशोरियों की उम्मीद बन गई है। ये बेटियां गांव-गांव जाती हैं, समस्याएं सुनती हैं, फिर उन्हें दबने नहीं देतीं और सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचाती हैं।
बाल विवाह रोकथाम और किशोरी स्वास्थ्य सहित अन्य मुद्दों पर काम कर रही शिव शिक्षा समिति राणोली की पहल से 2020 में युवा सलाहकार परिषद का गठन हुआ था। उद्देश्य युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करना और जमीनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाना था। आगे चलकर यह परिषद 15 से 25 साल की 15 किशोरियों व युवतियों का समूह बनी, जो पीपलू ब्लॉक की 25 ग्राम पंचायतों के 118 गांवों और टोंक ब्लॉक की 4 ग्राम पंचायतों के 15 गांवों की किशोरियों का प्रतिनिधित्व करती है।
सर्वसम्मति से वसुंधरा प्रजापत को अध्यक्ष और ज्योति गौतम को सचिव चुना गया। इनके नेतृत्व में परिषद ने हाल ही में जिला स्तर पर अपनी आवाज बुलंद की। परियोजना अधिकारी पूनम जोनवाल ने बताया कि परिषद की सदस्य अपने क्षेत्र की किशोरियों की समस्याएं सुनकर उन्हें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाती हैं। स्कूली और ग्रामीण क्षेत्र की समस्याओं के समाधान में ये अहम कड़ी बन रही हैं। जिला अधिकारी भी संबंधित विभागों से समन्वय कर समस्याओं के जल्द समाधान का प्रयास करते हैं। युवा सलाहकार परिषद समय-समय पर योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन भी करती है।
अधिकारियों के सामने उठाए ये मुद्दे
किशोरियों ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टोंक के सचिव एडीजे दिनेश कुमार जलुथरिया और सीईओ जिला परिषद परशुराम धानका के समक्ष कई अहम मुद्दे रखे। ‘उड़ान’ योजना में निशुल्क सेनेटरी पैड की बंद आपूर्ति का मुद्दा उठाया। स्कूलों में छात्राओं के शौचालय और इंसीनरेटर मशीनों की खराब स्थिति सामने रखी। पानी और सफाई की कमी, गरिमा और शिकायत पेटी की जानकारी का अभाव तथा ‘नो बैग डे’ पर जीवन कौशल शिक्षा न होने का मुद्दा भी परिषद ने प्रमुखता से उठाया।
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